Thursday, 12 January 2012

आशियाना


आशियाना



आओ नया जहाँ बसाएँ, एक आशियाँ ऐसा बनाएँ...
सूरज की पहली किरण, आशाएं दिल में जगाये...
रात को चंदा मामा प्यारा, चांदनी हम पर बरसाए...
रिमझिम-रिमझिम वर्षा आये, उमंगों को मन में भर जाए...
भीगी-भीगी मृदा की खुशबू, रोम-रोम को फडकाये...
बागीचे में चिड़ियाँ प्यारी, चिं-चिं चिं-चिं करती जायें...
रंग-बिरंगे फूल जो आयें, जीवन खुशबू से महकाएँ...
शीतल-शीतल पवन के झोंके, देह को ठंडक पहुचाएं...
आओ नया जहाँ बसाएँ, एक आशियाना नया बनाएँ...
स्वप्नलोक हो ऐसा मानो, बेख़ौफ़ गगन में उड़ते जाएं...

:: PIYUSH >~~~~~~~~~~~~> PRIYAM ::

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