Tuesday, 10 January 2012

माँ!!!





गंगाजल सी पावन निर्मल...
ममता का उदगम हो तुम,
मेरे ह्रदय में बसने वाली...
ईश्वर की एक मूरत तुम,
प्यार-त्याग कोई सीखे तुमसे...
मेरी है सब खुशियाँ तुमसे.
बैठी तुम परदेस में...
कैसे तुमको गले लगाऊं?
भेज कर संदेसा अपना...
भावना मन की बतलाऊँ.
मेरा बस इतना है कहना...
तुम सदा ऐसी ही रहना

"I LOVE YOU MOM"
स्नेह और सम्मान के साथ मेरी माँ को समर्पित
...पियूष... 

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