Friday, 13 January 2012

नेता





मैं नेता हूँ, मैं नेता हूँ, मैं खून तुम्हारा पीता हूँ...
नहीं चाहिए रोटी-दाल, मैं खाकर नोट जीता हूँ.
न डालोगे वोट मुझे तो, फिर किसको तुम डालोगे?
और किसी को जो डाला तो, हड्डी भी चबवालोगे...
ओ बेचारे भारत के बच्चे! बच कर कहाँ तू जायेगा?
एनाकोंडा से बच गया तो, डायनासोर तुझे खायेगा...
अबे बेवकूफ आम आदमी, मुझ को तू अपनाले...
थोडा खून मुझे पिला कर, अपनी जान बचाले...
थोडा खून मुझे पिला कर, अपनी जान बचाले...



आपका शुभचिंतक...
एक भारतीय नेता...




नोट: कृपया आपना कीमती वोट मुझे देकर अपनी जान बचाएँ.

दिल...




दिल बोला आँखों से: मेरा क्या कसूर है? देखती हो तुम, तडपना मुझ को पड़ता है...

आखों बोली: साले! नासमझ बेचारे! मोहब्बत कर कम, बरसना हम को पड़ता है..

Thursday, 12 January 2012

आशियाना


आशियाना



आओ नया जहाँ बसाएँ, एक आशियाँ ऐसा बनाएँ...
सूरज की पहली किरण, आशाएं दिल में जगाये...
रात को चंदा मामा प्यारा, चांदनी हम पर बरसाए...
रिमझिम-रिमझिम वर्षा आये, उमंगों को मन में भर जाए...
भीगी-भीगी मृदा की खुशबू, रोम-रोम को फडकाये...
बागीचे में चिड़ियाँ प्यारी, चिं-चिं चिं-चिं करती जायें...
रंग-बिरंगे फूल जो आयें, जीवन खुशबू से महकाएँ...
शीतल-शीतल पवन के झोंके, देह को ठंडक पहुचाएं...
आओ नया जहाँ बसाएँ, एक आशियाना नया बनाएँ...
स्वप्नलोक हो ऐसा मानो, बेख़ौफ़ गगन में उड़ते जाएं...

:: PIYUSH >~~~~~~~~~~~~> PRIYAM ::

Tuesday, 10 January 2012

यादें...




यादें आपकी आती है तो उनमे खो लेते है...
दिल भर आये तो ज़रा रो लेते है...
नींद आखों में आती नहीं लेकिन...
ख्वाबों में आओगे सोच कर सो लेते है...

इश्क...




इश्क ही तो किया था, गुनाह है क्या?
गुनाह हमने कर लिया, सजा है क्या?
बेवफा सनम ने, तन्हा मुझे छोड़ दिया.
अब तो मौत भी लगे यूँ के, मज़ा है क्या?

गुजरे ज़माने...



समंदर के खजाने साहिल पर, आप नहीं आते...

खुशियों के फ़साने लबो पर, बेबाक नहीं आते...
मोका है तो उड़ जा, ओ मन के परिंदे...
एक बार जो गुजरे ज़माने तो, लौट नहीं आते...

प्यार...




बरसो हो गए राख बने हुए पर, धुआं उठता खतों से बार - बार क्यूँ है?
ज़माना गुज़र गया ज़ख़्मी हुए पर, दिल से लहू रिसता बार - बार क्यूँ है?
कोशिशें तो मैं करता ही रहता हूँ पर, मेरा महबूब इतना लाचार क्यूँ है?
मुझ पर प्यार की कमी नहीं पर, चलता पैसे से ही घर-बार क्यूँ है?